Wednesday, May 30, 2012

" मैँ वहीँ हूँ "

 मैँ वहीँ हूँ :

कभी उन रास्तोँ पर जाना जहाँ
हम मिले थे ,
 तो
थोड़ी देर रुकना ,
 और सोँचना कि हम क्योँ मिले थे ?
 और फिर चल पड़ना , 
शायद जवाब न आये !!
 पर चलते रहना और ,
 थोड़ी देर के बाद फिर रुकना
 और सोँचना कि हम क्योँ अलग हुये ? 
और क्योँ तुम बिना कुछ बताये ही
 वापस आ गये मुझे छोड़कर आखिर क्योँ ?
 शायद इसका भी जवाब न आये 
पर तुम चलते रहना रुकना मत . . . . .. 
पर अब रुकना और सोँचना कि
 क्या तुमने सही किया था ?
और अब तुम्हेँ रुकना पड़ेगा 
जवाब न आने तक !!
अगर वो जवाब " न " है तो 
थोड़ा गौर से देखना उन रास्तोँ पर 
किसी के पैरोँ के निशान हैँ
 हाँ वो मेरे हैँ मैँ वहीँ हूँ जहाँ हम अलग हुये थे "
 मै आज भी 
तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ
 क्योँकि मुझे आज भी उस कसम के मायने पता हैँ 
जिसमेँ हम ने साथ मन्जिल तय करने की बात कही थी ,
 मैँ नहीँ भूला पर शायद तुम ..... पता नहीँ !                       
                                              
                         ............Anurag Misra