मैँ वहीँ हूँ :
कभी उन रास्तोँ पर जाना जहाँ
हम मिले थे ,
तो
थोड़ी देर रुकना ,
और सोँचना कि हम क्योँ मिले थे ?
और फिर चल पड़ना ,
शायद जवाब न आये !!
पर चलते रहना और ,
थोड़ी देर के बाद फिर रुकना
और सोँचना कि हम क्योँ अलग हुये ?
और क्योँ तुम बिना कुछ बताये ही
वापस आ गये मुझे छोड़कर आखिर क्योँ ?
शायद इसका भी जवाब न आये
पर तुम चलते रहना रुकना मत . . . . ..
पर अब रुकना और सोँचना कि
क्या तुमने सही किया था ?
और अब तुम्हेँ रुकना पड़ेगा
जवाब न आने तक !!
अगर वो जवाब " न " है तो
थोड़ा गौर से देखना उन रास्तोँ पर
किसी के पैरोँ के निशान हैँ
हाँ वो मेरे हैँ मैँ वहीँ हूँ जहाँ हम अलग हुये थे "
मै आज भी
तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ
क्योँकि मुझे आज भी उस कसम के मायने पता हैँ
जिसमेँ हम ने साथ मन्जिल तय करने की बात कही थी ,
मैँ नहीँ भूला पर शायद तुम ..... पता नहीँ !
कभी उन रास्तोँ पर जाना जहाँ
हम मिले थे ,
तो
थोड़ी देर रुकना ,
और सोँचना कि हम क्योँ मिले थे ?
और फिर चल पड़ना ,
शायद जवाब न आये !!
पर चलते रहना और ,
थोड़ी देर के बाद फिर रुकना
और सोँचना कि हम क्योँ अलग हुये ?
और क्योँ तुम बिना कुछ बताये ही
वापस आ गये मुझे छोड़कर आखिर क्योँ ?
शायद इसका भी जवाब न आये
पर तुम चलते रहना रुकना मत . . . . ..
पर अब रुकना और सोँचना कि
क्या तुमने सही किया था ?
और अब तुम्हेँ रुकना पड़ेगा
जवाब न आने तक !!
अगर वो जवाब " न " है तो
थोड़ा गौर से देखना उन रास्तोँ पर
किसी के पैरोँ के निशान हैँ
हाँ वो मेरे हैँ मैँ वहीँ हूँ जहाँ हम अलग हुये थे "
मै आज भी
तुम्हारा इन्तजार कर रहा हूँ
क्योँकि मुझे आज भी उस कसम के मायने पता हैँ
जिसमेँ हम ने साथ मन्जिल तय करने की बात कही थी ,
मैँ नहीँ भूला पर शायद तुम ..... पता नहीँ !
............Anurag Misra
